मां की सेवा
मां की सेवा
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बहुत पुरानी बात है..
गर्मी के दिनों में एक सेठ दोपहर के समय अपने कमरे में आराम कर रहा था और नौकर बाहर बैठा पंखा खींच रहा था कि सेठ और नौकर दोनों की नींद आ गयी ।
गर्मी के मारे सेठ की नींद खुल गयी तो उसने पानी के लिए नौकर को आवाज़ दी । मगर जवाब न पाकर खुद बाहर निकला तो देखा कि नौकर बेख़बर सो रहा है ।
नौकर एक लड़का था जिस के जेब में थोड़ा सा बाहर निकला हुआ एक खत रखा हुआ था । सेठ ने समझा कि कही मेरे ही नाम का होगा इसलिए उसे निकाल कर पढ़ा तो लिखा था :
" खुश रहो बेटा,
दुआ के बाद मालूम हुआ कि तुम्हारा 2 रुपए का मनीऑर्डर आया है। मैं बहुत खुश हुई कि अल्लाह तआला ने तुम्हारा रोजगार लगा दिया है । इन दो रुपए में से एक रुपए का तो मैंने गेहूं खरीद लिए और एक रुपए बनिए को दे दिया जो अपने पांच रुपए मांग रहा था । इसी तरह खर्च भेजते रहोगे तो पांच माह में बनिए का कर्ज उतर जाएगा । अल्लाह तआला तुम्हें बरकत दें ।
तुम्हारी माँ "
खत को पढ़ कर सेठ के दिल पर लड़के की अपनी मां की खिदमत का इतना असर हुआ कि उसने चुपके से पांच रुपए अपनी जेब से निकाल कर खत समेत लड़के के जेब में रख दिया और अंदर जा कर फिर आवाज़ दी तो लड़का जाग गया ।
जब लड़के को जेब भारी मालूम हुई तो देखा उस की जेब में पांच रुपए रखे पड़े है । लड़का बड़ा घबड़ाया और मालिक के पास पानी ले जा कर कहने लगा -
" अभी जरा सी नींद क्या लग गयी थी इसी दौरान किसी ने मेरे जेब में पांच रुपए डाल दिए कि मुझे चोर बना कर पकड़वा देगा । मगर खुदा जानता है की मैंने ये रुपए अपनी जेब में नही डालें है ।"
सेठ ने कहा डरो मत !
ये रुपए ईश्वर ने तुम्हे मां की सेवा करने से खुश हो कर दिलवाएं है । अब बताओ तुम इन्हें क्या करोगे ?
लड़के ने कहा : अगर ये रुपए मेरे होते तो मैं अपनी मां को भेज देता कि बनिए का कर्ज उतार दे ।
सेठ ने कहा : घबड़ाओ नही ! ये रुपए मैंने खुद तुम्हारी जेब में रखें है , बेशक मां को भेज दो । इस के अलावा आज से एक रुपए महीना तुम्हारी सच्चाई का इनाम भी दिया जाएगा क्योंकि अल्लाह तआला सच्चों को पसंद करते है ।
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